शब्दार्थ :- आधी को छोड़कर,पूरी पाने के पीछे भागने पर,पूरी तो मिलती नहीं है लेकिन आधी भी चली जाती है।
भावार्थ
:- जो प्राप्त हो गयी हो ऐसी आधी चीज का संतोष न मानकर,पूरी पाने का
प्रयास करता है,उसे पूरी तो मिले न मिले लेकिन मिली हुई चीज भी हाथ से चली
जाती है।
छदाम को छाजलो, छै टका गंठाई का। शब्दार्थ :-छदाम (सिक्के
का एक मान जो छः दामों अर्थात् पुराने पैसे के चौथाई भाग के बराबर होता था
) का सूपड़ा लेकिन उसको बनवाने का दाम छह सिक्कों जितना। भावार्थ :- किसी वस्तु की वास्तविक कीमत तो कम हो,परन्तु उसको उपयोग लेने लायक बनाने की कीमत कई गुना ज्यादा लगे ।
नौकरी रे नकारे रो बैर है ! शब्दार्थ :- नौकरी के और नकार(मनाही ) में बैर है ! भावार्थ :- नौकर मालिक की बात से मना नहीं कर सकता,मालिक की बात को न करने से नौकरी नहीं हो सकती है।
अणमांग्या मोती मिलै, मांगी मिलै न भीख। शब्दार्थ :- बगैर मांगे मोती मिल जाता है,जबकि मांगने से भीख भी नहीं मिलती है। भावार्थ :- मांगे
बगैर भी कोई मुल्यवान चीज़ मिल जाती है जबकि कई बार मांगने पर भी तुच्छ
वस्तु हांसिल नहीं होती है,वरन आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती है।
कदेई बड़ा दिन,कदेई बड़ी रात ! शब्दार्थ :- कभी दिन बड़े होते हैं तो कभी रात बड़ी हो जाती है। भावार्थ :- 1.संसार सदा परिवर्तनशील है, समय हमेशा एक समान नहीं रहता।
2.कभी किसी एक का दांव चल जाता है तो कभी किसी दूसरे का,हर बार किसी का समय एक जैसा नहीं रह पाता है।
शब्दार्थ :- बोया कहीं और गया था,लेकिन उग गया कहीं दूसरी जगह पर !
भावार्थ :- अस्थिर मनोस्थिति वाले व्यक्ति एक जगह या एक बात पर पर टिक नहीं सकते हैं,वे अपना स्थान या अपना मत बदलते रहते हैं।
शब्दार्थ :- कोई व्यक्ति जोरदार
मारता है या किसी और प्रकार से चोट पहुंचता है,परन्तु रोने नहीं देता या
उसका दुःख भी प्रकट नहीं करने देता है। भावार्थ
:- कोई व्यक्ति या संस्थान अपने अधिकारों या बल का प्रयोग करते हुए किसी
को हानि पहुंचाता है और सामने वाले को उस बात का प्रतिकार करने या दुःख
प्रकट करने का भी मौका न दे।