Monday, May 2, 2011

घणों धी,थाम्बा पर न'ई रगडी ज्यै !.

घणों धी,थाम्बा पर न'ई रगडी ज्यै !.

शब्दार्थ :- ज्यादा घी उपलब्ध हो तो भी,खम्भे पर नहीं चुपड़ा (लगाया) जा सकता है !

भावार्थ :- साधनों की आसानी से उपलब्धता को व्यर्थ नहीं किया जाता है !

घी ढुळीयो तो मुगां में .

घी ढुळीयो तो मुगां में .
अर्थ :- कुछ नुकसान हुआ , हो तो भी घूम - फिर कर  अपने पास ही लौट आना .

बींद रे मुंडे लाळौं पड़े , जानिया लाई कई करे !

बींद रे मुंडे लाळौं पड़े,जानिया लाई कांई करे !

शब्दार्थ :- वर के मुँह से लार गिरे,तो बाराती बचारे क्या करे ?
भावार्थ :- नेतृत्व ही लालचवश कमजोर हो जाये तो ,टीम लाचार हो जाती है  .

धणो हेत टूटण ने,मोठी आँख फूटण ने !

धणो हेत टूटण ने,मोठी आँख फूटण ने !
शब्दार्थ :- ज्यादा प्रेम का अंत लड़ाई से होता है और ज्यादा बड़ी आँख आखिरकार फुट कर ही रहती है।  
भावार्थ  :- अति हर चीज़ की बुरी होती है,फिर चाहे किसी के प्रति अत्यधिक प्रेम ही क्यों न हो।

मन बाहर रा पावणा , थने घी घालूं के तेल !

मन बाहर का पावणा , थने घी घालूं के तेल !

शब्दार्थ :-  बगैर इच्छा के आये हुए महमान,तेरा स्वागत भोजन में घी ङाल कर करूं या तैल ङाल कर।                            
 
भावार्थ :- बगैर दिल से जो काम करना पड़े , उसे येन-केन तरीके से निपटाना .

जेड़ो खावे अन्न , वेड़ो होवै मन !

जेड़ो खावे अन्न , वेड़ो होवै मन !
अर्थ :- यथा आहार , तथा विचार .


काळा सागे गोरो बेठे तो, रंग नई तो लखण तो आवैई !

काळा सागे गोरो बेठे तो, रंग नई तो लखण तो आवैई !
अर्थ :- जैसे लोगों की संगत होगी,उनका  असर तो आता ही है .