Saturday, August 9, 2014

खायो- पियो एक नाम , मारयो कुट्यो एक़ नाम।

खायो- पियो एक नाम , मारयो कुट्यो एक़ नाम।

शब्दार्थ - चाहे एक कौर खाया   हो या फिर भरपेट, भोजन करने वालों में तो गिनती हो ही जाती हैं,इसी प्रकार चाहे किसी को थोड़ा पीटे या अधिक, पीटने का नाम तो हो ही जाता है।

भावार्थ :- किसी कार्य को चाहे वो अच्छा हो या बुरा, न्यूनाधिक मात्रा में किये जाने पर भी सभी जगह चर्चा में आ ही जाता है।

घी सुधारे खीचड़ो ,अ'र बड़ी बहु को नाम !

घी सुधारे खीचड़ो ,अ'र बड़ी बहु को नाम !


शब्दार्थ :- घी की अच्छी मात्रा से खीच स्वदिष्ट बन गया ,परन्तु बनाने वाली बड़ी बहु की वाह-वाही हो गयी।

भावार्थ :- साधन की प्रचुरता से कार्य सफल हुआ,परन्तु कार्य करने वाले को सफलता का श्रेय मिल गया।

पञ्चां को कैणो सिर माथै , पण पनाळो अठै ई पडसी.......

पञ्चां को कैणो सिर माथै , पण पनाळो अठै ई पडसी.......

शब्दार्थ - पंचों का निर्णय सिर आँखों पर,लेकिन मेरे घर का पनाला (बरसात के पानी की नाली ) तो यहीं गिरेगा....

भावार्थ:-अनुभवी और प्रतिष्ठित व्यक्ति का फैसला नीतिगत रूप से उचित होते हुए भी,अपनी जिद्द पर अड़े रहना .....

चालणी में दूध दुवै, करमां ने दोस देवै !

चालणी में दूध दुवै, करमां ने दोस देवै !


शब्दार्थ :- चलनी में दूध दुहना और अपने भाग्य को दोष देना।

भावार्थ :- काम को अच्छी रूप-रेखा बनाये बगैर करना और व्यर्थ ही भाग्य को कोसना।

गधेडा ही मुलक जीतले,तो घोड़ा न कुण पूछै। ….

गधेडा ही मुलक जीतले,तो घोड़ा न कुण पूछै। ….

शब्दार्थ - यदि गधे ही मुल्क फतह करले तो फिर घोड़ो को कौन पूछेगा ?

भावार्थ - यदि अप्रशिक्षित व्यक्ति अथवा अपूर्ण साधन से ही कार्य पूर्ण किया जसके तो फिर प्रशिक्षित व्यक्ति या उपयुक्त साधन की क्या जरूरत रहेगी ?

अस्यो भगवानयो भोळो कोनी,जको भुको भेंस्या में जाये.

अस्यो भगवानयो भोळो कोनी,जाको भुको भेंस्या में जाये.

शब्दार्थ :- ऐसा भगवान नामक व्यक्ति तो नासमझ नहीं है की, भूखा ही भैंस चराने के लिए जाये।

भावार्थ :- प्रतिफल की इच्छा के बिना कोई भी व्यक्ति काम नहीं करता है।

खोयो ऊँट, घड़ा म्है ढूँढै !

खोयो ऊँट, घड़ा म्है ढूँढै !

शब्दार्थ :- ऊँट खो गया है और उसे छोटे से घड़े में  ढूंढा जा रहा है।

भावार्थ :- अत्यधिक ठगे जाने / नुकसान हो जाने पर उस चीज़ को, जहां वापस मिलाना असम्भव हो वहां पाने की आशा करना।