Friday, October 3, 2014

राणाजी केहवे वठैई रेवाड़ी !

राणाजी केहवे वठैई रेवाड़ी !

शब्दार्थ :- महाराणा जहां कहे वहीँ उनकी राजधानी हो सकती है।

भावार्थ :-समर्थ एवं समृद्ध व्यक्ति की उचित/अनुचित हर बात को हर जगह प्रधान्य मिलता है।

धणो हेत टूटण ने,मोठी आँख फूटण ने !

धणो हेत टूटण ने,मोठी आँख फूटण ने !

शब्दार्थ :- जरुरत से ज्यादा प्रेम का टूटन निश्चित है और अधिक बड़ी आँख का फूटना भी !

भावार्थ :- अति हर चीज़ की बुरी होती है,फिर चाहे वो किसी अच्छी बात या चीज़ की ही क्यों ना हो। 

आंधी पीसे , कुत्ता खाय , पापी रो धन परले जाय !

आंधी पीसे , कुत्ता खाय , पापी रो धन परले जाय !

 शब्दार्थ :- अंधी औरत अनाज पीसती है , लेकिन कुत्ता खा लेता हैं,पापी के धन का नाश होता है।

भावार्थ :-पाप कर्म से और अनुचित कार्य से अर्जित धन का विनाश हो जाता है ।

बाप बता ,के( न'ई तो ) श्राद्ध कर !

बाप बता ,के( न'ई तो ) श्राद्ध कर !

शब्दार्थ :-या तो तुम्हारे पिताजी को दिखाओ या फिर उनका श्राद्ध कर डालो।

भावार्थ :-अपनी बात का सुबूत दिखाओ या फिर उस बात की समाप्त  कर दो जिस पर विवाद है।

कदै घी घणा,कदै मुट्ठी चणा !

कदै घी घणा,कदै मुट्ठी चणा !             -                            
                  
शब्दार्थ :- कभी बहुत अधिक घी प्राप्त मिल गया और कभी केवल एक मुट्ठी चने ही मिले।                            
भावार्थ :- किसी वस्तू या परिस्तिथि की कभी बहुतायत होना और कभी अत्यंत कमी या न्यूनता होना ।

न जाण , न पिछाण, हूँ लाडा री भुवा !

न जाण ,न पिछाण, हूँ लाडा री भुवा !

शब्दार्थ :- न जान, न पहचान, मैं वर की भुआ
भावार्थ :- किसी बात की गहराई को जाने बिना अपना मत रखना और उसे मनवाने की जिद्द करना ।

Thursday, October 2, 2014

मांग्या मिलै रे माल, जकांरै कांई कमी रे लाल !

मांग्या मिलै रे माल, जकांरै कांई कमी रे लाल !

शब्दार्थ :- जिनको मांगने से ही धन मिल जाता है,उनको किसी चीज़ की क्या कमी हो सकती है ?

भावार्थ :-ऐसे लोग जिनको अपना गुजारा/काम ही मांग-तांग कर चलाना होता है,उनको क्या परेशानी हो सकती है ? परन्तु जिनका उद्देश्य परिश्रम से ही सफलता हांसिल करना होता है,उनको कष्ट तो सहन करना ही पड़ता है।