Tuesday, December 9, 2014

छदाम को छाजलो, छै टका गंठाई का।

छदाम को छाजलो, छै टका गंठाई का।
शब्दार्थ :-छदाम (
सिक्के का एक मान जो छः दामों अर्थात् पुराने पैसे के चौथाई भाग के बराबर होता था ) का सूपड़ा लेकिन उसको बनवाने का दाम छह सिक्कों जितना।
भावार्थ :-  किसी वस्तु की वास्तविक कीमत तो कम हो,परन्तु उसको उपयोग लेने लायक बनाने की कीमत कई गुना ज्यादा लगे ।

Sunday, December 7, 2014

बगल में छोरो, गांव़ में ढींढोरौ !

बगल में छोरो, गांव़ में ढींढोरौ !

शब्दार्थ :- लड़का अपने पास ही हो और लडके को ढूंढने के लिए गांव में ढिंढोरा पीटना !

भावार्थ :- कोई चीज अपने पास ही मौजूद हो,लेकिन उसे हर तरफ ढूंढना।

Saturday, December 6, 2014

कागद री हांडी चूल्है चढै कोनी !

कागद री हांडी चूल्है चढै कोनी !

शब्दार्थ :- 
कागज की हंडिया चूल्हे पर नहीं चढ़ती।

भावार्थ :- बेईमानी से किया हुआ कार्य सफल नहीं होता है।

नौकरी रे नकारे रो बैर है !

नौकरी रे नकारे रो बैर है !
शब्दार्थ :-
नौकरी के और नकार(मनाही ) में बैर है !
भावार्थ :-
नौकर मालिक की बात से मना नहीं कर सकता,मालिक की बात को न करने से नौकरी नहीं हो सकती है।

Thursday, December 4, 2014

करणी जिसी भरणी !

करणी जिसी भरणी !

शब्दार्थ :- जैसा कर्म,वैसा प्रतिफल !

भावार्थ :- जैसा कार्य करेंगे ,फल भी उसी प्रकार का प्राप्त होगा ।

अणमांग्या मोती मिलै, मांगी मिलै न भीख।

अणमांग्या मोती मिलै, मांगी मिलै न भीख।

शब्दार्थ :- बगैर मांगे मोती मिल जाता है,जबकि मांगने से भीख भी नहीं मिलती है।
भावार्थ :- मांगे बगैर भी कोई मुल्यवान चीज़ मिल जाती है जबकि कई बार मांगने पर भी तुच्छ वस्तु हांसिल नहीं होती है,वरन आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती है।

कठैई जावो पईसां री खीर है !

कठैई जावो पईसां री खीर है !

शब्दार्थ :- कहीं भी चले जाएँ,पैसें की ही खीर है।

भावार्थ :- हर जगह पर पैसे का ही महत्त्व है।